न कोई संगी साथी ऐसा, जो जीवन में साथ चले,
इन मेलों में रहकर, मजबूर हम अकेले चले |
राम गयो रावण गयो, ताको बहु परिवार |
कह नानक थिर कछु नहीं, स्वप्नेहु ज्यों संसार ||
भय नाशन दुरमति हरण, कलि में हरि को नाम |
निश दिन नानक जो जपे, सफल होवहि सब काम ||
जे को जनम मरण ते डरे, साध जना की शरणि पड़े |
जे को अपना दुःख मिटावे, साध जना की सेवा पावे ||
संगी साथी चल गए सारे, कोई न निभयो साथ |
कह नानक इह बिपत में, टेक एक रघुनाथ ||
sadho........sadhowad
ReplyDeleteRam ki tulana ravan se karana thik nahi hai
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