Wednesday, March 30, 2011

जय श्री कृष्णा....



संसार का चिंतन चिंताग्रस्त करता है, और भगवान का चिंतन सभी चिंताओं से मुक्त करता है।

संसार में हर व्यक्ति चिंतन करता है, चिंतन किये बिना कोई व्यक्ति एक क्षण भी नहीं रह सकता है, संसार के चिंतन से व्यक्ति संसार को प्राप्त होता है, और भगवान चिंतन से व्यक्ति भगवान को प्राप्त होता है।

जब व्यक्ति भगवान का चिंतन करता है तो संसार का चिंतन नहीं होता है, और जब व्यक्ति भगवान का चिंतन नहीं करता है तो संसार का चिंतन स्वतः ही होने लगता है।

इसलिये व्यक्ति को हमेशा यह जानने का प्रयत्न करना चाहिये कि उसके मन में कौन सा चिंतन चल रहा है।

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